जानकर बनो, समझदार बनो, पढ़े-लिखे तो मुंबई वाले भी होते

आज हम आपको समाज की दो तस्वीर दिखाने की कोशिश कर रहे है। एक तस्वीर समाज के पढ़े लिखे और खुद को सभ्य बताने वाले की है वहीं दूसरी तस्वीर एक ऐसे वर्ग की है जिन्हें हम सभ्य नही मानते, ये अनपढ़ है, और दैनिक मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते है।

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